आलेख – वैक्सीन मे भी एपीएल बीपीएल-एपीएल का आरक्षण एक जागरूक नागरिक को तकलीफ तो देता ही है – cgtop36.com | Cgtop36 Chhattisgarh exclusive news web portal
देश विदेश

आलेख – वैक्सीन मे भी एपीएल बीपीएल-एपीएल का आरक्षण एक जागरूक नागरिक को तकलीफ तो देता ही है

मेरे पोस्ट पर हर समय बहुत प्रतिक्रिया आती है । पर कुछ उत्साही लोग मुझे मोदी समर्थक कहते है । कुछ हद तक कहूँ तो मै इसे स्वीकार करने मे हिचक भी नहीं है । एक राष्ट्रवादी विचारधारा होने के कारण मुझे यह बंदा सबसे करीब लगता है ।  वहीं आरएसएस के कारण भी मै प्रभावित हू । चलो विषय पर आऊ अब मै आपसे ही पूछता हू कि मै किसके लिए लिखू ।   मै एक एक दल से शुरू करता हू ।  वो दल जो आजादी के पहले का है और जिसकी स्थापना भी एक अंग्रेज ने ही की वह दल  जिसने करीब छह दशको तक राज भी किया । पर आज जब मै देखता हू कि वह जब उनका ही दल हमारे आराध्य पर ही प्रश्न करे और कोर्ट में यह कहे कि राम हुए ही नहीं राम सेतु था ही नहीं जिसको नासा ने भी माना फिर एक हिंदू के नाते मै इस दल का समर्थन क्यो कर लू ।  वहीं देश मे मुंबई जैसी घटनाओं के बाद इतने आतंकवादी हमलों के बाद इस सरकार ने कौन सा प्रतिकार कर लिया सिर्फ श्रद्धांजलि देने के सिवाय  । इनके ही सरकार मे आतंकवादी घटनाओं पर जब यह कार्यवाई भी करे और आंसू भी बहाए तो आतंकवादी घटनाओं पर इनके रूख वहीं इशरत को बिहार की बेटी कहना आतंकवादीयों के लिए इतना स्नेह निश्चित मन को कचोटता था ।  वहीं इनके एक प्रदेश ने तो गैंग स्टार को अपने यहां मेहमान नवाजी के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गये इतना प्यार  ।  वहीं वैक्सीन मे भी एपीएल बीपीएल-एपीएल का लोचा एक जागरूक नागरिक को तकलीफ तो देता ही है । लिखने को बहुत है पर इतना कहकर कि इस देश के संसाधनों पर अल्पसंख्यकों का पहले अधिकार है मतलब साफ है कि हम सिर्फ यहां सिर्फ बचा खुचा रहकर लेने के लिए है ।  अब आया जाये बहु चर्चित पारिवारिक पार्टी जिनके मुखिया कहते है बलात्कार के मामलों में बच्चो से गलतियाँ हो जाया करती है  । वहीं आज के पार्टी अध्यक्ष जिन्होने अपने ही पिता को पदच्युत कर पार्टी पर कब्जा कर लिया । फिर यह बंदा कहे कि यह वैक्सीन तो मोदी जी की वैकसीन है बीजेपी की वैकसीन है ऐसा कहकर वैक्सीन को लेकर भ्रांति फैलाये वहीं एम वाय की राजनीति करे ऐसे पारिवारिक पार्टी पर मै कैसे विश्वास करू । फिर एक दल जो दलित की राजनीति करे अपने बाद भतीजे को लाये वहीं उनके उपर उन्ही के लोग टिकट को बेचने का आरोप लगाये  ।  वहीं यह दल है जहां कई गैंगसटर लोगों की जगह भी रही है  ।   फिर आगे महाराष्ट्र के राजनीतिक तक सीमित दल जो पहले हिंदुत्व की बात करे बाबरी ढांचे को गिराने का श्रेय ले वह पार्टी सत्ता के लिए धर्म निरपेक्षता के साथ समझौता कर ले तो कैसे इन पर भरोसा जताया जा सकता है।  वहीं एक और दल जिनके गृहमंत्री को पैसा उगाही के कारण इस्तीफा तक देना पडा।   इनके दल के नेता ने तो पहले ही अपने मंत्री को क्लीन चिट दे दी थी ।  यह वही दल है जहां पालघर मे दो साधुओं की  नृशंस हत्या वो भी पुलिस की मौजूदगी में हुई पर जांच मे कहीं भी न्याय नहीं मिला  । वहीं यह धर्म निरपेक्षत दल होने के बाद सत्ता के लिए सांप्रदायिक दलो के साथ समझौता कर ले तो कैसे विश्वास किया जा सकता  है  ।  अब आया जाये लेफ्ट दलो के उपर यह वो दल है जिन्होंने जेएनयू से लेकर अपने प्रभाव के सभी विश्वविधालय मे भारत तेरे टुकडे होंगे की बहुत ढपली बजाई थी । यह वो लोग है जिन्होंने चुनाव तो लडा पर मोदी जी को हराने के नाम से  वहां समर्थन देकर अपने ही मतदाताओं के  साथ विश्वासघात किया । आज वहां के घटनाक्रम पर इन लोगों के मुंह में दही जमाए बैठे है । इनका तीन दशक का इतिहास रक्त रंजित रहा है  ।   वहीं एक और दल जिनके मुखिया को ही जय श्री राम के नारे से घृणा है ।  पहली बार दो दिन का प्लास्टर से सहानुभूति पैदा कर चुनाव में नैया पार होने के बाद वहां तनाव में लोगों की हत्या बलातकार की घटनाओं ने साबित कर दिया है  कि कैसे लोगों से या कार्यकर्ताओं से युक्त पार्टी है ।  जो बंदी दुर्गा मां के विसर्जन के लिए हाईकोर्ट का रास्ता दिखलाये उस पर क्या भरोसा किया जाए ।  एक महाशय का दल और है जो सबेरे से लेकर शाम तक पानी पी पी पीकर हिंदूओ को गाली दे स्वंय यह फिल्मी अभिनेता खुद चुनाव हार गया है वहां क्या किया जा सकता है । दक्षिण की वो पार्टी जिन्हे हिंदी से ही नफरत है कुल मिलाकर पारिवारिक पार्टी और दक्षिण ही उनके लिए भारत है वहां कया रोल हो सकता है ।  चले एक पार्टी की तरफ और रूख किया जाए उस पार्टी ने आजादी के समय पाकिस्तान में मिलने के लिए लडाई लडी थी वो सिर्फ एक धर्म के लिए बनी पार्टी है ।  उसके एक नेता यह कहते है कि पंद्रह मिनट के लिए पुलिस हटा लो फिर देखो साहब के सभा मे ही पाक जिंदाबाद के नारे लगे थे यह सब लोग धर्म निरपेक्ष है ।  केरल मे भी वही हाल है ।  फिर एक बहुत महत्वपूर्ण जो दिल्ली में राज कर रही है बडी आदर्श वाली पार्टी है अपने ही गुरू को काम निकलने का बाद फेंक दिया है  । एक सौ पचास करोड़ रूपये के विज्ञापन से कोरोना से लडा गया है । वहीं पांच हजार के बिस्तर के अस्पताल का ढिंढोरा पीटा गया बाद मे वहां के लोग आक्सीजन की कमी से मौत हुई है  । इनके पार्षद छत मे शस्त्रों से लैस रहते है इनके खजाने भी धर्म देखकर ही खुलते है । यह सब लोग धर्म निरपेक्ष दल है ।  मेरे लेख की आलोचना करने वाले यह बताये वो इनमे से किसके लिए प्रतिबद्ध हैं  ।  फिर मेरे को सलाह दे । बस इतना ही डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ ( इस लेख के लेखक पेशे से आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं)

Related Articles

Back to top button