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आलेख – आज पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम का बयान आश्चर्यजनक, जाने माने वकील से इस तरह के बयान की उम्मीद नही

आज  पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम का बयान  जो आया है काफी आपत्तिजनक है । महोदय जी ने विद्रोह करने के लिए आव्हान कर दिया।  यहां लोकतंत्र है और अगर कोई कुछ गलत कर रहा है तो न्याय पालिका की व्यवस्था भी है । मैं चलो  पूर्व वित्त मंत्री के बात से पूरी तरह से भी सहमत हो जाऊं  तो इस हालात मे उनके पास न्याय पालिका जाने के रास्ते भी खुले है । महोदय एक जाने माने वकील भी है ऐसे हालात में वो सब कानूनी कार्रवाई से तो पूर्ण रूप से परिचित है । विगत दो दशकों से देश के विभिन्न सरकारो का अहम हिस्सा रहे है तो उन्हे यह सब मालूम भी है । चलो मान भी लिया जाए पर वह बंदा कैसे किसी को नैतिकता का पाठ पढा सकता है  । जब स्वंय के उपर ही भ्रष्टाचार का आरोप लगा हुआ हो और जमानत पर बाहर हो वो बंदा  नैतिकता की बात कर रहा है। चले आज कोरोना के नाम से इस्तीफा मांगा जा रहा है  ।  क्या इसके लिए सिर्फ मोदी जी ही जिम्मेदार हैं।  क्या उन  के राज्यो की कोई जवाबदेही नहीं है जहां विपक्ष की सरकार है । क्या महाराष्ट्र में जब कोरोना बढ रहा था तो फिर वहां के वसूली कांड में चिदंबरम जी की चुप्पी भी संदेहास्पद है ।  क्यो नही दो शब्द उस पर भी बोले । जब पूरा प्रदेश कोरोना मे ग्रसित थी कैसे उनके सहयोगी दल ने ऐसा काम कर दिया।  तब उनकी यह नैतिकता क्यो नही जागी । खैर एक निर्वाचित सरकार को हटाने के लिए इस तरह का आव्हान कैसे जायज हो सकता है । पिछले सत्तर साल से कांग्रेस थी यहां तक आपातकाल भी लगाया गया तो भी किसी भी तत्कालीन विपक्षी दलों ने विद्रोह की बात नहीं कि जनता ने मतदान कर सरकार को हटाया । पर ऐसी बात किसी ने नहीं की । सत्ता के बगैर रहना इन नेताओं को सीखना होगा  ।  अगर हटाना है तो जनता के बीच जाकर अपनी पहलें अपनी विश्वसनीयता लानी होगी ।  अभी मै एक्जिट पोल देख रहा था महोदय जी की पार्टी की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है  ।   साहब कोविड मे तो यूरोप हिल गया अमेरिका भी हिल गया । यह जरूर है कि हम नियंत्रित होते कोरोना मे कुछ लापरवाह से हो गये । इसमें  फिर दोष जनता का भी है राज्य सरकारों का भी है फिर किसी भी दलों की सरकार हो । फिर अकेले मोदी जी पर ही कैसे ठीकरा फोड सकते है यह पूर्व वित्त मंत्री  । कुल मिलाकर यह बयान गैर जिम्मेदाराना है किसी भी नेता ने इस बयान की निंदा नहीं की जो दुर्भाग्य जनक है ।  यह अलोकतांत्रिक बयान है जिसकी जितनी निंदा की जाए कम है ।  यह तो जरूर है एक चुनी हुई सरकार के खिलाफ भड़काने की कोशिश कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं है । हमारे यहां इन राजनीतिक बयानों की जवाबदेही तय नहीं होती इसलिए इन लोग गैर जिम्मेदाराना बयान देकर सुर्खियो मे बने रहने के लिए आदत सी  ही हो गई  है  । जिस दिन जिम्मेदारी तय होगी फिर ऐसे बयां देखने को नहीं मिलेंगे  ।  एक जिम्मेदार नेता के हैसियत से नेताजी को बयान वापस लेकर माफी मांगना चाहिए  ।  बस इतना ही 
डा .चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ

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