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छत्तीसगढ़

देश को लंबे समय तक लॉकडाउन की स्थिति में नहीं रखा जा सकता – रघुराम राजन

कोरोना वायरस का तेज संक्रमण रोकने के लिए जो राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन चल रहा है, उसके कारण भारत में अब तक का सबसे गहरा आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और ख्यात अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने ऐसी आशंका जताई है।

आजादी के बाद से अब तक के सबसे बड़ी आपातकाल

राजन ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में लिखा, ‘आर्थिक तौर पर आज की तारीख में भारत आजादी के बाद से अब तक के सबसे बड़ी आपातकाल का सामना कर रहा है। इससे पहले साल 2008-09 के दौरान मांग में भारी गिरावट की वजह से गंभीर वित्तीय संकट की स्थिति पैदा हो गई थी। लेकिन, तब के हालात अलग थे। हमारे कामगार काम पर जा रहे थे। कंपनियां वर्षो से शानदार ग्रोथ दर्ज कर रही थीं, हमारा फाइनेंशियल सिस्टम मोटे तौर पर मजबूत था और सरकार की माली हालत भी अच्छी थी। लेकिन, अभी ऐसा कुछ नहीं है, क्योंकि हम कोरोना वायरस की महामारी का सामना कर रहे हैं।’

हम वायरस को मात दे सकते हैं

राजन के मुताबिक उचित उपायों के जरिए इस संकट का सामना किया जा सकता है और मुश्किलें कम की जा सकती हैं। इसके लिए कंटेनमेंट ( रोकथाम ) को प्राथमिकता देनी होगी और जरूरतमंदों पर अधिक संसाधन खर्च करने होंगे। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, ‘सही संकल्प और प्राथमिकताओं के साथ हमें उन संसाधनों पर गौर करना होगा, जिनके मामले में हम मजबूत स्थिति में हैं। ऐसा करके हम इस वायरस को मात दे सकते हैं और बेहतर उम्मीदों वाले कल की जमीन तैयार कर सकते हैं।’

खास रणनीति बनाने की जरूरत

राजन के मुताबिक हालांकि अधिक से अधिक संदिग्धों की जांच और वायरस पॉजिटिव लोगों के इलाज एवं उन्हें अन्य लोगों के संपर्क में आने से बचाने ( क्वारेंटाइन ) के उचित इंतजाम करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन देश को लंबे समय तक लॉकडाउन की स्थिति में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार को उन क्षेत्रों में पूरी सावधानी के साथ कामकाज फिर से शुरू करने के तरीकों के बारे में सोचना होगा, जो इस वायरस के प्रकोप से कम प्रभावित हुए हैं।

वहीं खर्च करें, जहां जरूरत है

राजन के मुताबिक फिलहाल सरकार को यह पक्का करने की जरूरत है कि निम्न मध्यवर्ग के आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों और वेतन न पाने वाला तबका लॉकडाउन के इस मुश्किल दौर में भी जीवनयापन कर सके। उन्होंने कहा, ‘अधिकांश जरूरतमंद परिवारों के बैंक खातों में रकम डालना अच्छी रणनीति साबित हो सकती है, लेकिन जैसा कि अन्य विशेषज्ञों का भी कहना है इस तरह के लाभ सभी को नहीं देना चाहिए।’ राजन ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘संसाधनों के इस्तेमाल के मामले में जरूरतमंद लोगों पर खर्च को पहली प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’

कोरोना संकट से निपटने के बताए तरीके

-जांच का दायरा बढ़ाना और इलाज व क्वारेंटाइन की उचित व्यवस्था

-देश को लंबे समय तक लॉकडाउन की स्थिति में नहीं रखा जा सकता

-जरूरतमंदों को सरकार की तरफ से वित्तीय मदद का पक्का इंतजाम

-छोटे-मोटे उद्योगों के लिए आसान शर्तो पर पर्याप्त लोन की व्यवस्था

-बड़ी कंपनियों को चाहिए कि वे बॉन्ड मार्केट से पूंजी का इंतजाम करें बॉन्ड खरीद को प्रोत्साहन राजन ने कहा कि बैंकों, बीमा कंपनियों और बॉन्ड म्यूचुअल फंडों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है कि वे नए इन्वेस्टमेंट-ग्रेड बॉन्ड की खरीदारी करें। इस मामले में भारतीय रिजर्व बैंक को भी उचित माहौल बनाने के प्रयास करने होंगे।

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