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लॉकडाउन बना मवेशीयो के लिए सुखभरा ,सड़क पर डेरा, मिल रहा दाना-पानी

राजधानी में पहले मुसीबत का सबब बनते थे मवेशी ।लॉकडाउन आवारा घूमने वाले मवेशीयो के लिए सुखभरा साबित होता हुआ आ रहा है नजऱ । दरअसल , कोविड -19 (कोरोना ) के संक्रमण से बचाव के लिए लॉकडाउन 19 दिनों के लिए और आगे बढ़ा दिया गया है। ऐसे स्थिति में आमजनो को घरो में ही रहने की सलाह दी गयी है।
आमजन घरो में बंद होकर जहाँ इस लॉकडाउन को सब्र रखकर बिता रहे है तो वही मवेशियों के बल्ले-बल्ले है। शहर में आये दिन ट्रैफिक जाम के सबब बनने वाले यह मवेशी इन दिनों खाली सड़को पर राज कर रहे है. लॉकडाउन के चलते सभी परिवहन व्यवस्था ठप्प पड़े हुए है ऐसे में इन मवेशियों के लिए शहर के गली-कूचे ही इनका घर बन गया है।

शहर के अक्सर भीड़-भाड़ इलाको में सड़को पर बैठने वाले इन मवेशियों को दुत्कार कर भागा दिया जाता था। इन मवेशियों के चलते आये दिन ट्रैफिक में व्यवधान ,सड़क दुर्घटना से दो-चार होना पड़ता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। शहर का कोई भी इलाका या बस्ती हो या पौष इलाका इन्हे अब रोकने- भगाने वाले घरो में बंद है और यह मवेशी सड़को पर स्वतंत्र होकर घूम रहे है। यह तस्वीर जौहरियों की परख करने वाले सदर बाजार की है जहाँ यह मवेशी दुकानों के बाहर ही अपना ठीहा बनाये हुए है। शहर के जी.ई रोडजहाँ सरपट गाडिय़ों के पहिये थमते नहीं वही ये मवेशी बीच सड़को पर ही बैठे हुए है। ऐसे ही शहर के अन्य इलाके पुरानी- बस्ती, लाखेनगर, कुशालपुर, भाटागांव, गोल बाज़ार है जहाँ ये पहले मुसीबत का सबब बनते थे।

इन मवेशियों को नगर निगम के काऊ-कैचर के द्वारा शहर के बाहर बने गौठानों में ले जाकर रखा जाता है।वही इनकी खाने-पीने रहने की व्यवस्था किया जाता है.लेकिन कोरोना के कहर से अभी नगर निगम के कुछ कर्मचारी भी छुट्टी में चल रहे है। उचित साधन की व्यवस्था नहीं हो पाने से इन्हे फि़लहाल लॉकडाउन तक सड़को पर ही अपना ठीहा बनाकर रहना पड़ेगा।
वही इन मवेशियों की खाने-पीने की व्यवस्था कुछ संस्था द्वारा किया जा रहा है। इसलिए अभी तो इन मवेशियों की मौज से दिन गुजऱ रहे है।

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